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सिफलिस होने के कारण कà¥à¤¯à¤¾ है।
सिफलिस बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤• तरह संकà¥à¤°à¤®à¤£ है जो टà¥à¤°à¥‡à¤ªà¥‡à¤¨à¥‡à¤®à¤¾ पैलिडम के कारण फैलता है। यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ यौन संपरà¥à¤• में आने से होता है और इसे छूत वाला इनà¥à¤«à¥‡à¤‚शन à¤à¥€ कहा जाता हैं। आमतौर यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ मà¥à¤‚ह, जननांग, गà¥à¤¦à¤¾à¤¶à¤¯ से या दरà¥à¤¦ रहित दाद के रूप में शà¥à¤°à¥‚ हो सकता है। हालांकि यौन संपरà¥à¤• बनाने के पहले यदि लेटेकà¥à¤¸ कंडोम का उपयोग किया जाà¤, तो सिफलिस संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचा जा सकता हैं। सिफलिस अकà¥à¤¸à¤° तब शà¥à¤°à¥‚ होता है जब बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ आपके शरीर में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ कर लेता है। इसके अलावा संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के साथ यौन संबंध बनाने से यौन के माधà¥à¤¯à¤® से शरीर में फैल जाता है। संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के दरवाजा और टेबल को छूने से शरीर में नहीं फैलता है। हालांकि इस संकà¥à¤°à¤®à¤£ के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ चरण होते है, जिसका सही समय पर उपचार करने से ठीक हो सकते हैं। बहà¥à¤¤ से लोगो के शरीर पर दरà¥à¤¦ रहित छाले अपने आप ठीक à¤à¥€ हो जाते है और उनको उपचार की जरूरत नहीं होती हैं। किंतॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ शरीर में रह जाते है इसलिठउपचार करवा लेना चाहिà¤à¥¤ इस संकà¥à¤°à¤®à¤£ का उपचार करने से दोबारा यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ नहीं होता है। लेकिन अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के संपरà¥à¤• में आने से पà¥à¤¨à¤ƒ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बॠसकती हैं। यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ महिला के अजनà¥à¤®à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है इसलिठसंकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ होने पर संà¤à¥‹à¤— न करें बलà¥à¤•ि उचित उपचार करना आवशà¥à¤¯à¤• होता हैं। आज के इस लेख में आपको सिफलिस होने के कारण के बारे में विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बताà¤à¤‚गे।Â
उपदंश (सिफलिस) के चरण ?
उपदंश (सिफलिस) के कारण कà¥à¤¯à¤¾ हैं ?
उपदंश (सिफलिस) के लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ हैं ?
उपदंश (सिफलिस) का उपचार कà¥à¤¯à¤¾ हैं ?
उपदंश (सिफलिस) के चरण ?
सिफलिस के चार चरण होते हैं। पहले और दूसरे चरण में सिफलिस अधिक संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• रहता है। इसमें लकà¥à¤·à¤£ नजर नहीं आते है और तीसरे चरण में अधिक घातक हो सकता है। चलिठविसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बताते हैं।Â
पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• उपदंश (सिफलिस) – यह सिफलिस का पहला चरण है जिसमे संकà¥à¤°à¤®à¤£ छोटे गोले के रूप में नजर आता है। यह छाले दरà¥à¤¦ व पीड़ा देता है और बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ जिस à¤à¤¾à¤— में जाते है वहां चकतà¥à¤¤à¥‡ होने लगता है। इसके अलावा मà¥à¤‚ह, जननांग, मलाशय के अंदर व बाहरी à¤à¤¾à¤— को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। यह छाले दो से छह सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक हो सकता है। सिफलिस के छाले सीधे यौन संपरà¥à¤• में आने से फैलता हैं।Â
माधà¥à¤¯à¤®à¤¿à¤• उपदंश (सिफलिस) – यह सिफलिस का दसà¥à¤¤à¤¾ चरण है। इस चरण में तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर चकतà¥à¤¤à¥‡ व गले में खराश होता है। चकतà¥à¤¤à¥‡ में खà¥à¤œà¤²à¥€ नहीं होती है। चकतà¥à¤¤à¥‡ हथेली व तलवो पर अधिक नजर आते है। हालांकि कà¥à¤› लोगो में चकतà¥à¤¤à¥‡ अपने आप ठीक हो जाते हैं।Â
छिपा हà¥à¤† उपदंश (सिफलिस) – यह सिफलिस का छिपा हà¥à¤† चरण है। पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• और तृतीय लकà¥à¤·à¤£ लकà¥à¤·à¤£ लà¥à¤ªà¥à¤¤ होने लगते है और आप संकà¥à¤°à¤®à¤£ से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ रहते है। संकà¥à¤°à¤®à¤£ कई साल तक बॠसकते हैं।Â
तृतीय उपदंश (सिफलिस) – यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ का अंतिम चरण होता है जो 15 से 20 % लोगो में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ कर लेते है जो की अपना उपचार नहीं करवाते हैं। संकà¥à¤°à¤®à¤• शà¥à¤°à¥‚ होने पर तीसरे चरण में जाने में à¤à¤• से दस साल तक हो सकता हैं।Â
उपदंश (सिफलिस) के कारण कà¥à¤¯à¤¾ हैं ?
यौन संपरà¥à¤• में आने पर पैलिडम बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ से दूसरे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में फ़ैल जाता है। इस वजह से संकà¥à¤°à¤®à¤£ उपदंश (सिफलिस) का कारण बनता है। बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ आपकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ में लगी आम चोट या खरोंच शà¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤®à¤¾ à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ के माधà¥à¤¯à¤® से पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ कर लेते हैं। उपदंश पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• व माधà¥à¤¯à¤®à¤¿à¤• चरण के दौरान अधिक संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• हो जाते है। यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ महिला के अजनà¥à¤®à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। सिफरीस संकà¥à¤°à¤®à¤£ दरवाजे के हैंडल को छूने या टायलेट सीट साà¤à¤à¤¾ करने से नहीं फैलता है। उपदंश ठीक होने पर दोबारा अपने आप नहीं होता है। लेकिन संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के संपरà¥à¤• में आने से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को दोबारा हो सकता हैं। (और पà¥à¥‡ – यौन शकà¥à¤¤à¤¿ बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के घरेलॠउपचार)
उपदंश (सिफलिस) के लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ हैं ?
उपदंश (सिफलिस) के लकà¥à¤·à¤£ चरण के आधार पर नजर आते है।Â
पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• उपदंश में छोटे छाले व पीड़ारहित आदि।Â
माधà¥à¤¯à¤®à¤¿à¤• उपदंश में बà¥à¤–ार, गले में खराश, थकान, सिरदरà¥à¤¦, वजन घटाना, सूजी हà¥à¤ˆ लसिका गà¥à¤°à¤‚थिया, मà¥à¤‚ह, गà¥à¤¦à¤¾, जननांग, मसà¥à¤¸à¥‡ जैसे छाले, मांसपेशियो में दरà¥à¤¦ आदि।Â
छिपा हà¥à¤† उपदंश में अवयसà¥à¤¤ चरण कई वरà¥à¤·à¥‹ तक रह सकता है। शरीर बिना लकà¥à¤·à¤£à¥‹ वाला रोग हो जाता है।
तृतीय उपदंश में बहरापन, अंधापन, मानसिक बीमारी, दिल की बीमारी, रीॠकी हडà¥à¤¡à¥€, तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा संबंधित विकार, नरम ऊतक आदि लकà¥à¤·à¤£ नजर आते हैं।
उपदंश (सिफलिस) का उपचार कà¥à¤¯à¤¾ हैं ? (What are the Treatments for Syphilis in Hindi)
उपदंश (सिफलिस) में पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• और माधà¥à¤¯à¤®à¤¿à¤• में उपचार व निदान करना आवशà¥à¤¯à¤• होता है। इस चरण में मà¥à¤–à¥à¤¯ उपचार पेनिसिलिन है जो à¤à¤• à¤à¤‚टीबायोटिक दवा की तरह काम करता है। अगर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को पेनिसिलिन से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ है, तो à¤à¤‚टीबायोटिक दे सकते है।Â
अगर आपको इस संकà¥à¤°à¤®à¤£ à¤à¤• वरà¥à¤· से अधिक समय नहीं हà¥à¤† है, तो पेनिसिलिन का इंजेकà¥à¤¶à¤¨ देकर रोका जा सकता है। यदि सिफरीस से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होकर à¤à¤• वरà¥à¤· से अधिक हो गया हो तो अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पेनिसिलिन की जरूरत पड़ सकती है।Â
उपदंश से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के लिठपेनिसिलिन उपचार बतलाया गया है। जिन महिला को पेनिसिलिन से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है उनको विसà¥à¤—à¥à¤°à¤¹à¥€à¤•रण की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ कर सकते है। नवाजत शिशॠको à¤à¤‚टीबायोटिक देकर बचाया जा सकता है।
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